Takat Par Ghamand

दोस्तों, जो जैसा करेगा उसको वैसा ही मिलेगा ये प्रकृति का नियम है, किसी के साथ बुरा और अपने Takat Par Ghamand कभी नहीं करना चाहिए|

Takat Par Ghamand

एक बार एक गाँव में कबीर नाम का एक आदमी रहता था. जो बहुत ताक़तवर तो था, लेकिन ज्यादा अकलमंद नहीं था. कबीर बहोत ग़रीब परिवार से था.

गरीबी से परेशान होकर सोचा कि दूर शहर जायेगा और शहर जाकर कुछ काम कर के कुछ पैसे कमायेगा.

कबीर ने अपने पिता जी से कहा : “पिता जी  मैं शहर जाना चाहता हूं. और शहर जाकर पैसे कमाना चाहता हूँ.”

पिता जी ने कहा : “बेटा तुम शहर मत जाओ, क्यों कि शहर मै ताक़त के साथ साथ अक़ल की भी ज़रूरत होती है.”

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मगर कबीर ने अपने पिता जी की बात नहीं मानी और शहर की तरफ चल दिया. गाँव और शहर के बीच एक बड़ी नदी थी और शहर जाने के लिए नदी पार करना पड़ता था. नदी पार कर के लोग शहर आया जाया करते थे और नदी पार करने के लिए नाव से जाना पड़ता था.

कबीर के पास नदी पार करने के लिए एक भी रुपये किराया नहीं था, इसलिए कबीर ने अपनी ताकत दिखाते हुए नाव वाले से मारपीट करली और जबरन नाव में चढ़ गया.

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बेचारा नाववाला कमजोर था, इसी लिए कुछ नहीं करपाया; लेकिन नाव वाला अपना बदला लेना चाहता था. नाववाले ने नाव को एक टापू पर रोक दिया, और बोला के नाव मै कुछ तकनीकी खराबी हो गई है.

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कुछ देर यही रुकना पड़ेगा; नाव की मरम्मत कर के आगे शहर जायेगे. नाव पानी में तो नहीं रुक सकती थी; इसलिए नाववाले ने कबीर से कहा निचे जाकर रस्सी से नाव को पेड़ से बांध दो.

कबीर अपनी ताकत पर घमंड करते हुये बोला:” इसमें कोनसी बड़ी बात है; मै अभी नाव को पेड़ से बांध देता हूँ. और कबीर रस्सी लेकर कूद गया.”

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नाववाला तो अपना बदला लेना चाहता था. इस लिए नाववाले ने रस्सी काट दि और; नाव लेकर शहर चला गया. बेचारा कबीर वहि खड़ा नाव को शहर जाता देकता रह गया.

Moral : असल में कबीर को उसके किये की सजा मिली थी; जो उस ने नाववाले के साथ ताक़त के घमंड में मारपीट कि थी; अगर आज हम किसी के साथ बुरा करेंगे तो; कल हमारे साथ भी बुरा होगा. इसी लिए कभी भी  Takat Par Ghamand नहीं करना चाहिए.

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