Chhatrapati Shivaji Maharaj – भारती नव सेना के पिता

महाराज छत्रपति शिवाजी गोलकुंडा की सल्तनत और बीजापुर की सल्तनत के साथ-साथ मुगल, अंग्रेज और औपनिवेशिक शक्तियों के साथ गठबंधन और युद्व दोनों करते रहे, सन १६३० से सन १६८० तक की Chhatrapati Shivaji Maharaj की वीर गाथा ।

Chhatrapati Shivaji Maharaj

“जो इस धरती को अपना मानेगा, वही इस धरती पर राज करेगा “

 

Chhatrapati Shivaji Maharaj का जन्म सन १६३०

शिवाजी महाराज भारत के वीर पुत्र, बहादुर योद्धा, जिनका जन्म पुणे के शिवनेरी, जूनर मे १९ फरवरी १६३० ( महारष्ट्र सरकार ) या अप्रैल १६२७ को हुआ था | माँ का नाम जीजाबाई, जिनहोने शिवाजी को निडरता और इंसानियत की हमेसा इज़्ज़त करना सिखाया |

पिता का नाम श्री शाहजी भोसले, जो के डेक्केन सल्तनत मै जनरल के ओधे पर कार्यरत थे | शिवाजी की परवरिश माँ जीजभाई ने बहोती ही धार्मिक तरीके से कीथी, रामायण, महाभारत, भागवत गीता, सभी कुछ सिखाया और पढ़ाया | श्री दादोजी कोडदेव जी शिवाजी के पहले गुरु, जिनहोने सुरुवाती और आगामी शिक्षा दी |

Chhatrapati Shivaji Maharaj का पहेली फतेह सन १६४५

शिवाजी ने अपनी महज पंद्रह साल की उम्र से पुणे के मावल गांव से अपने सघर्ष की सुरुवात करदी, नगर का सारा कार-भार और सारी व्यवस्था किले से की जाती थी, इसिलए शिवाजी पहले से ही जानते थे, के किला जितना सबसे जरुरी है |

लेकिन दिक्कत येथी के, किले जितने के लिए सिपाही,असले, पैसे और बड़ी सेना चाहिए | शिवाजी ने मावल के लोगो को इक्कठा करना सुरु किया और गनिमी कावा (छापामार युद्ध) करना सुरु कर दिया |

शिवाजी मेहनत रंग लाई और अपनी पहेली जीत तोरण का किला जीता सन १६४५ | उसके बाद सिंहगढ़ का किला, राजगढ़ का किला, चाकन का दुर्ग और भी कई किले जीतें |

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छत्रपति शिवाजी महाराज और आदिल शाह सन १६४८

शिवाजी किले तोह जित रहे थे लेकिन इसे मुग़ल परेसान थे | मो. आदिलशा ने शिवाजी के पिता शाहजी को बंदी बना के कैद कर लिया | शिवाजी की असल परेशानिया यहाँ से सुरु हुइ | शिवाजी अपने पिता शाहजी भोसले जी की रिहाई के लिये मो. आदिलसह से मिलते है, और सन १६४९ अपने पिता को छुड़ा लेते है, और लगभग सात साल के लिए अपने युध पर विराम लगा देते है |

अब शिवाजी , सात साल के बाद सन १६५६ मै जवाली पर चढाई करना शुरू करते है | पहले पत्र भेजते है, जवाली के यसवंत राव चंद्रराव मोरे जी को, आप आत्म-समरपंड कर दीजिये हम कोई रक्त-पात नहीं करना चाहतें है |

लेकिन चंद्रराव मोरे जी आत्म-समरपंड करने से मना कर देतें है, लेकिन शिवाजी गामिनी कावा पर विश्वास रखतें थें | अपनी पुरे सेना के साथ जवाली पर हमला करतें है, और जावली पार फ़तेह कर लेते है | सन १६५७ मै हिंदवी स्वराज की स्थापना करतें है |

Chhatrapati Shivaji Maharaj और अफज़ल खान सन १६५७

अफज़ल खान अपनी फौज के साथै शिवाजी खोजना सुरु करता है | कई गांव जला देता है, कई लोगो पर अत्याचार करता है, शिवाजी की खोज करता है, लेकिन शिवाजी भी अफज़ल खान के हाथ नहीं आते है |

अफज़ल खान के बहोत खोजने पर भी जब शिवाजी हाथ नहीं आते है , तब अफज़ल खान ने शिवाजी से सन्धी करने का प्रस्ताव रखता है, शिवाजी को अकेले मिलने को कहा, और शिवाजी भी मान गए |

मिलने के शर्त येथी के शिवाजी और अफज़ल खान अकेले मे मिलेंगे | लेकिन शिवाजी के सचिव और सूभचितक रुस्तम-ए-जामा ने शिवाजी से पूछा “अफज़ल खान का कद लगभग ६.५ फुट है, और हठ्ठा-कठ्ठा है, अगर अफज़ल खान ने आप पर हमला किया तोह आप क्या करेंगे |”

Chhatrapati Shivaji Maharaj और अफज़ल खान सन १६५७

“शिवाजी ने कहा आप सही कह रहें है, तब रुस्तम-ए-जामा के सुझाव से शिवाजी भाघ-नख (Tiger Claw) पहेन कर अफज़ल खान से मिलने जातें है |

रुस्तम-ए-जामा के कहें मुताबिक अफज़ल खान शिवाजी पर हमला करने की नाकाम कोसिस करता है, लेकिन भाघ नख और रुस्तम-ए-जामा की होसियारी से शिवाजी वहां से बच निकलते है, और १० नवम्बर, १६५९ को प्रताप गड के किले पर मराठा जित लहराया दि |

Chhatrapati Shivaji Maharaj और सहिस्ता खान सान १६६३

शिवाजी सबसे पहेन मुगलिया सल्तनत के अहमद नगर और जूनार पर हमला करके जीत लेते है | इसपर औरगजेब को बहोत गुस्सा आता है, और औरगजेब अपने मामा सहिस्ता खान को, शिवाजी को पकड़ें के लिए तैनात कर दिया, और कहा के शिवाजी को पकड़ो और जान से मार डालो |

सहिस्ता खान अपनी पूरी ८० हजार की सेना लेके शिवाजी को पकड़ें निकल पड़ते है, पुणे, बीजपुर, मै जहाँ शिवाजी रहतें है | पुणे मे शिवाजी भी अपनी तैयारी करना सुरु कर देते है, और सहिस्ता खान के खिलाफ पर असुचित हमला (सर्जिकल स्ट्रीक) कर दिया |

लेकिन सहिस्ता खान भागने मे कामियाब हो जाता है, लेकिन इसमें शिवाजी महाराज; सहिस्ता खान का अंगूठा काट देतें है और; सहिस्ता खान को खदेड़े कर सूरत के किले पर जीत हासिल करतें है; सन १६६४ मे |

पुरंदर की संधि सन १६६५

सूरत की हार से गुस्साया औरंगजेब राजा जय सिंह को भेजता है; राजा जय सिंह अपनी १५ हजार की सेना के साथ शिवाजी पर हमला करता है; लेकिन कुछ फायदा नहीं होता है; राजा जय सिंह शिवाजी से सधी करने के लिए कहतें है |

बहोत मस्सकत के बाद शिवाजी और; राजा जय सिंह के बीच पुरंदर की संधि, ११ जून, सन १६६५ को होती है; जिसमे राजा जय सिंह शिवाजी को १२ किले और लगभग ४ लाख सोने के सिक्के देतें है; और २३ किले अपने पास रखतें है |

शिवाजी का ओरंगजेब से सामना सन १६६६

पुरंदर को संधि के बाद ओरंगजेब शिवाजी को मिलने के लिए आगरा मे बुलाया;  शिवाजी और ओरंगजेब को १२ मई १६६६ को मिलाना तय होता है; लेकिन शिवाजी को यहाँ बहोत नीचा दिखाया जाता है, और बहोत मज़्ज़ाक़ बनाया ओरंगजेब ने |

शिवाजी को छोटे मनसबदार के साथ खड़ा कर दिया जाता है; इस पार शिवाजी को गुस्सा आता है, और शिवाजी ओरंगजेब को आखें दिखा के बाहर चले जातें है; ओरंगजेब को भी गुस्सा आता है और शिवाजी को आगरा मे नजर बंद कर देते है |

शिवाजी भी भागने की योजना बनातें है; योजना के तहत शिवाजी बीमारी का बाहना बानाते है | शिवाजी फल दान करना सुरु करतें है; और बाद मे उसी फलो की टोकरी मे छुपके भागने मे कामियाब होजातें है; ओरंगजेब मुँह की खाके रह जाता है |

Chhatrapati Shivaji Maharaj का राज्य-अभिषेक सन १६७४

शिवाजी मुगलो से अब तक लगभग ४८ राज्य जीत चुके होते है; और यहां समुन्दर पार पूरा कब्ज़ा कर लिया था; जैसे अभी का गुजरात – महारष्ट्र – पूरे दक्षिण की समुंद्री सीमा पर; इसी लिए शिवाजी को पानी का राजा और भारतीय नव सेना का पिता कहा जाता है |

छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्य-अभिषेक सन १६७४

शिवाजी अब तक बिना किसी टाइटल के थे; लेकिन अब वो दिन आगया ६ जून, १६७४ को शिवाजी महाराज का भावी राज्य-अभिषेक हुआ और;

शिवाजी को छत्रपति शिवाजी महाराज ( सारी दीसाओ का महाराजा ) की उपाधि से नावाजा गया; राज्य-अभिषेक के १२ दिन के बाद १८ जून, १६७४ को माँ जीजाबाई का देहांत हो गया |

Chhatrapati Shivaji Maharaj का दक्षिण भारत पर जित सन १६७७

हैदराबाद का गोलकोण्डा, कर्नाटक का वेल्लोर और गिंगी; मैसूर का प्लेटो पर फ़तेह कर लेते है; इसके साथ लगभग पूरे भारत पर छत्रपति शिवाजी महाराज की वर्चस्व कायम कर लेते है |

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इसके बाद सन १६८० मे छत्रपति शिवाजी महाराज की तपिश रोग के कारन उनका निधन होगया | इसी के साथ छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रेरडात्मक जीवन का अंत होगया | आज भी छत्रपति शिवाजी महाराज का नाम भारतीय इतिहास मे अमर है |



छत्रपति शिवाजी महाराज की वीर गाथा पड़ने के लिए आप का बहोत – बहोत धन्यवाद; उम्मीद है आप को पसंद आया होगा | नीचे कमेंट कर के जरूर बताये आप को कैसा लगा |

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